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पुराने आपराधिक मामलों के आधार पर जिला बदर नहीं, हाईकोर्ट ने आदेश किया निरस्त

सिंगरौली के ब्रिजेश कुमार शाह को बड़ी राहत; गवाहों के भय और वर्तमान खतरे का ठोस आधार जरूरी बताया

जबलपुर/सिंगरौली। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने सिंगरौली से जुड़े एक मामले में जिला बदर की कार्रवाई को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि केवल पुराने आपराधिक प्रकरणों के आधार पर किसी व्यक्ति को जिला बदर नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने 17 जुलाई 2026 को ब्रिजेश कुमार शाह उर्फ विंदेश की याचिका स्वीकार करते हुए सिंगरौली जिला दंडाधिकारी और रीवा संभाग के कमिश्नर के आदेशों को निरस्त कर दिया।

जिला दंडाधिकारी सिंगरौली ने 26 सितंबर 2025 को ब्रिजेश कुमार शाह को 24 घंटे के भीतर सिंगरौली जिले और आसपास के क्षेत्रों से बाहर जाने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अपील को कमिश्नर रीवा संभाग ने 7 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

15 मामलों का उल्लेख, किसी में दोषसिद्धि नहीं

हाईकोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता के खिलाफ 15 आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख किया गया था। न्यायालय ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि तीन मामलों में वह बरी हो चुका था, दो मामले लोक अदालत में समझौते के आधार पर समाप्त हो चुके थे, जबकि छह मामलों में ट्रायल लंबित था। रिकॉर्ड के अनुसार किसी मामले में याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि नहीं हुई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि वह लाइसेंसी मनी लेंडर है और पंजीकृत वित्तीय व्यवसाय करता है। उसका पक्ष था कि उसके जवाब और दस्तावेजों पर उचित विचार किए बिना जिला बदर की कार्रवाई की गई।

गवाहों के भय पर ठोस आधार जरूरी

हाईकोर्ट ने जिला बदर आदेश में गवाहों के भय से जुड़े आधार का भी परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं था कि कौन से गवाह भय के कारण सामने नहीं आए, उन्हें किस प्रकार का खतरा था और उन्होंने बयान देने से क्यों इनकार किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला बदर जैसी कार्रवाई के लिए केवल आपराधिक मामलों की सूची पर्याप्त नहीं है। संबंधित व्यक्ति के वर्तमान आचरण और समाज के लिए बताए जा रहे खतरे के बीच ‘लाइव लिंक’ यानी जीवंत एवं निकट संबंध होना आवश्यक है।

दोनों प्रशासनिक आदेश निरस्त

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर माना कि जिला बदर की कार्रवाई के लिए आवश्यक ठोस सामग्री पर्याप्त रूप से सामने नहीं आई। इसके बाद न्यायालय ने 26 सितंबर 2025 के जिला दंडाधिकारी, सिंगरौली के आदेश और 7 अप्रैल 2026 के कमिश्नर, रीवा संभाग के आदेश को क्वैश यानी निरस्त कर दिया।

फैसले के बाद ब्रिजेश कुमार शाह को जिला बदर की कार्रवाई से राहत मिली है। न्यायालय की टिप्पणी यह भी रेखांकित करती है कि किसी व्यक्ति पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई करते समय पुराने मामलों और वर्तमान खतरे के बीच स्पष्ट कानूनी संबंध स्थापित करना जरूरी है।

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