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सरई नगर के हवा में घुला काला जहर

आंखों पर बंधी काली पट्टी,स्कूली बच्चों और राहगीरों की चीखें हुईं बे असर

सिंगरौली- देश की ऊर्जाधानी कहे जाने वाले सिंगरौली जिले का सरई इलाका इस समय प्रदूषण के गहरे काले साए में डूब चुका है। सरई रेलवे स्टेशन पर बने कोल यार्ड और नगर के मुख्य मार्ग से लगातार हो रहे अनियंत्रित कोयला परिवहन ने स्थानीय नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। इस पूरे काले कारोबार और अनियंत्रित कोयला परिवहन का मुख्य कर्ता-धर्ता जीटीसी (GTC – मुख्य ट्रांसपोर्टर) बना हुआ है। जीटीसी की अगुवाई में सरई नगर के मुख्य मार्ग से चौबीसों घंटे नियम-कायदों को ताक पर रखकर कोयले का परिवहन किया जा रहा है। इस जानलेवा खेल में केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि कोयला परिवहन में शामिल अन्य सहयोगी ट्रांसपोर्टरों की पूरी सहभागिता है जो चंद रुपयों के मुनाफे के लिए स्थानीय जनता और स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य का सौदा कर रहे हैं।

GTC के संरक्षण में अन्य ट्रांसपोर्टरों की खुली छूट
सूत्रों की मानें तो सरई कोल यार्ड के मुख्य ट्रांसपोर्टर GTC के पदचिन्हों पर चलते हुए अन्य छोटे-बड़े ट्रांसपोर्टर भी स्थानीय नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मुख्य मार्ग से गुजरने वाले इन ट्रांसपोर्टरों के सैकड़ों ट्रक न तो सही तरीके से तिरपाल से ढके होते हैं और न ही कोल यार्ड या सड़कों पर पानी के छिड़काव की कोई व्यवस्था की गई है। मुख्य मार्ग पर उड़ता कोयले का गुबार इन सभी ट्रांसपोर्टरों की आपसी जुगलबंदी और प्रशासनिक सांठगांठ का सीधा नतीजा है। ऐसा लगता है कि सिंगरौली कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों पर प्रशासनिक अनदेखी की काली पट्टी बंधी हुई है, जिन्हें जनता की तकलीफें नजर नहीं आ रही हैं।

उड़ती धूल,हांफती सांसें और बेबस नौनिहाल
सरई नगर का मुख्य मार्ग जो कभी आम नागरिकों और स्कूली बच्चों के आवागमन का सुरक्षित रास्ता था अब इन ट्रांसपोर्टरों की भारी-भरकम गाड़ियों और उड़ती कालिख का डंपिंग ग्राउंड बन चुका है। जीटीसी और उसके सहयोगी ट्रांसपोर्टरों के ट्रकों की तेज रफ्तार और उड़ती डस्ट के कारण राहगीरों का सड़क पर चलना दूभर हो गया है। बच्चों के सफेद यूनिफॉर्म स्कूल पहुंचने से पहले ही काले हो रहे हैं, और उनके फेफड़ों में कोयले की कालिख जमा हो रही है। क्षेत्र में दमा,एलर्जी,आंखों में जलन और सांस की गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य और सुरक्षा के सारे दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।

प्रदूषण विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
नियमों के मुताबिक कोयला परिवहन करने वाले वाहनों को पूरी तरह तिरपाल से ढका होना चाहिए और सड़कों पर लगातार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। लेकिन सरई में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मुख्य ट्रांसपोर्टर जीटीसी और अन्य सहयोगी कंपनियों की इस मनमानी की जानकारी सिंगरौली कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को अच्छी तरह है। इसके बावजूद, इन ट्रांसपोर्टरों पर भारी जुर्माना लगाने या इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। बंद कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों को धरातल पर तड़पती जनता की पुकार सुनाई नहीं दे रही है।

कब जागेगा प्रशासन
प्रदूषण की मार झेल रहे आक्रोशित नगर वासियों और यात्रियों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है? मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बावजूद स्थानीय अमला मौन क्यों है? क्या सिंगरौली कलेक्टर इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर सरई कोल यार्ड और मुख्य मार्ग पर हो रहे इस जानलेवा प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर जनता यूं ही इस काले धुएं में घुट-घुट कर जीने को मजबूर रहेगी?।

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