CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी, जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बने : पार्षद प्रेम सागर मिश्रा
एनटीपीसी, एनसीएल सहित कंपनियों के सामाजिक दायित्व कार्यों की निगरानी मजबूत करने की उठाई मांग

वैढ़न, सिंगरौली। नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक-36 के पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने औद्योगिक कंपनियों द्वारा खर्च किए जाने वाले कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंड के उपयोग में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि CSR का उद्देश्य क्षेत्र के वास्तविक विकास और आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन कई बार योजनाओं का लाभ धरातल तक नहीं पहुंच पाता।
पार्षद प्रेम सागर मिश्रा ने कहा कि CSR फंड के सही उपयोग में सबसे बड़ी समस्या कमजोर निगरानी व्यवस्था, योजनाओं की प्रभावी समीक्षा का अभाव और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन नहीं होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार कंपनियां केवल कानूनी प्रावधानों को पूरा करने के उद्देश्य से औपचारिकता निभाती हैं, जिससे वास्तविक सामाजिक विकास प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि CSR राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार जैसे स्थायी विकास कार्यों में होना चाहिए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि केवल कागजी कार्यवाही या प्रचार-प्रसार तक सीमित रहने से CSR का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
पार्षद ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा और कंपनियों द्वारा किए जा रहे CSR कार्यों की जानकारी लेकर उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि जनता की भागीदारी से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि CSR फंड का सही उपयोग हो और विकास कार्य वास्तविक जरूरतों के आधार पर किए जाएं।
उन्होंने औद्योगिक कंपनियों से अपील की कि वे अपने सामाजिक दायित्व को केवल छवि निर्माण का माध्यम न बनाएं, बल्कि सिंगरौली के गांवों और प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए ईमानदारी से कार्य करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन, कंपनियों और जनता के बीच बेहतर समन्वय से ही क्षेत्र में स्थायी विकास संभव है।










