असम में मुस्लिम विवाह पंजीकरण की व्यवस्था बदली
अब काजी नहीं, सरकारी रजिस्ट्रार करेंगे विवाह और तलाक का पंजीकरण

गुवाहाटी। असम में मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने असम मुस्लिम विवाह पंजीकरण अनिवार्य नियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब मुस्लिम विवाह और तलाक का पंजीकरण काजी के माध्यम से नहीं, बल्कि सरकारी विवाह रजिस्ट्रार के कार्यालय में किया जाएगा। अधिक आवेदन होने की स्थिति में पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी पंजीकरण के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था असम विधानसभा द्वारा 2024 में पारित असम मुस्लिम विवाह और तलाक के अनिवार्य पंजीकरण कानून के आधार पर तैयार की गई है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य पूरे राज्य में विवाह और तलाक के पंजीकरण की एक समान और पारदर्शी सरकारी व्यवस्था विकसित करना है।
30 दिन में कराना होगा पंजीकरण
नई व्यवस्था के तहत मुस्लिम विवाह का पंजीकरण विवाह की तारीख से 30 दिन के भीतर कराना होगा। तलाक के पंजीकरण के लिए भी एक महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है। धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न होने के बाद उसका सरकारी रिकॉर्ड निर्धारित प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाएगा।
नए कानून में नाबालिग विवाह के पंजीकरण से जुड़े पुराने प्रावधानों को भी हटाया गया है। सरकार का कहना है कि अनिवार्य पंजीकरण से विवाह की उम्र और संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए औपचारिक व्यवस्था मजबूत होगी।
फर्जी या जाली प्रमाणपत्र तैयार करने अथवा प्रस्तुत करने पर दो साल तक की सजा, 10 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। कानून के उल्लंघन पर एक साल तक की सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी बताया गया है।
इस बदलाव के साथ विवाह के धार्मिक अनुष्ठान और सरकारी पंजीकरण को अलग-अलग प्रक्रिया के रूप में स्पष्ट किया गया है। अब विवाह का आधिकारिक रिकॉर्ड सरकारी पंजीकरण व्यवस्था के तहत तैयार होगा।













