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103 साल पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत, इंदौर की सड़कों पर निकला झांकियों का भव्य कारवां

 

इंदौर। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार शाम इंदौर की सड़कों पर आस्था, कला, तकनीक और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर की 103 साल पुरानी ऐतिहासिक झांकी परंपरा एक बार फिर पूरे उत्साह के साथ जीवंत हो उठी। शाम करीब छह बजे पारंपरिक झांकी चल समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही शहर की प्रमुख सड़कें रोशनी से जगमगा उठीं और खजराना गणेश सहित विभिन्न मिलों, संस्थाओं और सरकारी निकायों की झांकियों का कारवां निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने लगा।

चल समारोह शाम को शुरू होना था, लेकिन झांकियों का जमावड़ा दोपहर से ही निर्धारित मार्ग पर दिखाई देने लगा था। आयोजक झांकियों को तय क्रम में खड़ा करने और उनके साथ आने वाले दलों की व्यवस्थाओं में जुटे रहे। शाम होते-होते मार्ग के दोनों ओर दर्शकों की भीड़ बढ़ने लगी। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे और युवा भी झांकियां देखने पहुंचे।

6.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर निकला कारवां

ऐतिहासिक झांकी चल समारोह का मार्ग करीब 6.5 किलोमीटर लंबा है। इस पूरे मार्ग पर देर रात तक लोगों की आवाजाही बनी रहने की संभावना है। इस बार 90 से अधिक अखाड़े भी समारोह का हिस्सा बने हैं। झांकियों के साथ अखाड़ों के पारंपरिक प्रदर्शन ने आयोजन में एक अलग रंग भर दिया।

इस वर्ष खजराना गणेश, इंदौर विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अलावा होप टेक्सटाइल्स, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल और राजकुमार मिल सहित विभिन्न संस्थाओं की झांकियां शामिल हैं।

परंपरा में आधुनिक तकनीक का तड़का

इंदौर की झांकियां लंबे समय से अपनी कलात्मकता, विशाल आकार और आकर्षक विद्युत सज्जा के लिए पहचानी जाती हैं। इस बार भी पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। झांकियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, त्रिआयामी तकनीक, हाइड्रोलिक प्रणाली और विशेष विद्युत प्रभावों का उपयोग किया गया है।

झांकी निर्माण में जुटे कलाकारों के अनुसार इंटरनेट मीडिया के दौर में किसी आयोजन की प्रस्तुति केवल स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं रहती। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार दृश्य प्रभावों और तकनीकी प्रस्तुतियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

300 से अधिक कारीगरों ने दो माह की मेहनत से तैयार की झांकियां

इस विशाल आयोजन के पीछे सैकड़ों कारीगरों की मेहनत है। जानकारी के अनुसार 300 से अधिक कारीगरों ने करीब दो महीने तक काम कर विभिन्न झांकियों को तैयार किया। विशाल ढांचे तैयार करने से लेकर विद्युत सजावट और तकनीकी प्रभावों तक अलग-अलग स्तर पर कारीगरों ने काम किया।

इस बार 26 से अधिक विषयों पर झांकियां तैयार की गई हैं। इनमें धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को भी शामिल किया गया है। अलग-अलग संस्थाओं की झांकियों में उनकी अपनी कलात्मक शैली और विषय की प्रस्तुति देखने को मिल रही है।

पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ चल समारोह

प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना और आरती के बाद भगवान खजराना गणेश की झांकी के साथ चल समारोह की शुरुआत की गई। इसके बाद एक-एक कर अन्य झांकियां निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ती गईं। झांकियों के साथ चल रहे दलों और अखाड़ों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

मिलों की पुरानी परंपरा से आधुनिक संस्थाओं तक

इंदौर के झांकी चल समारोह में मिलों की भूमिका ऐतिहासिक रही है। समय के साथ औद्योगिक संस्थानों के अलावा नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण और अन्य संगठनों की भागीदारी भी बढ़ी है। इस वर्ष पुरानी मिलों की झांकियों के साथ नई संस्थाओं की प्रस्तुतियां भी दिखाई दे रही हैं।

इससे आयोजन में पुराने इंदौर की औद्योगिक और सांस्कृतिक स्मृतियों के साथ आधुनिक शहर की बदलती पहचान भी नजर आ रही है। रोशनी से सजे विशाल रथ, कलात्मक प्रस्तुतियां, धार्मिक प्रतीक और आधुनिक तकनीक से सजी झांकियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

103 वर्ष पहले शुरू हुई यह परंपरा समय के साथ बदलती रही, लेकिन इसका मूल आकर्षण आज भी बरकरार है। अनंत चतुर्दशी की रात इंदौर की सड़कों पर उमड़ी भीड़ और झांकियों का विशाल कारवां शहर की इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा की निरंतरता को दर्शाता नजर आया।

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