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बालाघाट के हेडमास्टरों की पदोन्नति पर हाई कोर्ट में उठा सवाल, डीपीसी की प्रक्रिया जांच के घेरे में

 

जबलपुर। बालाघाट जिले में पदस्थ हेडमास्टरों और उच्च श्रेणी शिक्षकों की लेक्चरर पद पर पदोन्नति का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित शिक्षकों के मामलों पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने वास्तव में विचार किया था या नहीं। अदालत के सामने अब पदोन्नति से ज्यादा यह सवाल अहम हो गया है कि पात्र शिक्षकों के प्रकरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत समिति के समक्ष रखे गए थे या नहीं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता करण सिंह ठाकुर ने पक्ष रखते हुए बताया कि संबंधित शिक्षक बालाघाट जिले में पदस्थ थे और लेक्चरर पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता रखते थे। इसके बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया में उनके प्रकरण अपेक्षित तरीके से शामिल नहीं किए गए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि प्रक्रिया में बालाघाट जिले का नाम अथवा वहां के संबंधित शिक्षकों के प्रकरण किसी चूक के कारण छूट गए। ऐसे में मामला केवल पदोन्नति नहीं मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि पात्र शिक्षकों के मामलों पर विभागीय स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार हुआ था या नहीं।

हाई कोर्ट ने तत्काल पदोन्नति का आदेश नहीं दिया

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सीधे पदोन्नति देने के बजाय पहले प्रशासनिक रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करने को प्राथमिकता दी। अदालत ने शासन से जानकारी मांगी है कि बालाघाट जिले के संबंधित हेडमास्टरों और उच्च श्रेणी शिक्षकों के प्रकरण डीपीसी के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे या नहीं।

यदि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि पात्र शिक्षकों के मामलों पर डीपीसी ने विचार नहीं किया था, तो पदोन्नति प्रक्रिया में संभावित प्रशासनिक चूक का सवाल आगे न्यायिक परीक्षण के दायरे में आ सकता है।

डीपीसी के रिकॉर्ड पर टिकी नजर

राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ऐश्वर्या सिंह ने शासन से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से समय मांगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए समय निर्धारित कर दिया।

अब शासन को संबंधित विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। डीपीसी की बैठक, उसमें प्रस्तुत किए गए प्रकरण, संबंधित शिक्षकों की पात्रता और उन पर समिति द्वारा किए गए विचार से जुड़े दस्तावेज इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की है। उस दौरान शासन की ओर से प्राप्त निर्देश और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर मामले में आगे की सुनवाई होगी।

फिलहाल अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यही है कि बालाघाट के संबंधित शिक्षकों को लेक्चरर पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित प्रक्रिया में विधिवत शामिल किया गया था या नहीं। शासन के जवाब और विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।

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