मझौली कोल माइंस से 329 विस्थापित श्रमिकों को हटाने का आरोप, कलेक्टर को सौंपा सात सूत्रीय ज्ञापन

सिंगरौली। जेपी अमिलिया नॉर्थ कोल माइंस मझौली प्रबंधन द्वारा 329 विस्थापित श्रमिकों को नौकरी से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए अमिलिया नॉर्थ कोयला खदान कर्मचारी ट्रेड यूनियन कांग्रेस मझौली ने कलेक्टर सिंगरौली को सात सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। संगठन ने विस्थापित श्रमिकों को तत्काल रोजगार पर वापस लेने तथा जिन किसानों की जमीन खदान के लिए अधिग्रहित की गई है, उसे वापस किए जाने की मांग की है।
संगठन के अनुसार, वर्तमान में खदान का संचालन अदाणी समूह के प्रबंधन के अधीन है। आरोप है कि पुनर्वास नीति 2002 तथा कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच हुए रोजगार संबंधी समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि 329 विस्थापित भू-स्वामियों एवं श्रमिकों को बिना नोटिस और निर्धारित श्रम प्रावधानों का पालन किए 17 अगस्त 2026 को रोजगार से हटा दिया गया।
यूनियन के संरक्षक देवेंद्र कुमार पाठक, अध्यक्ष विद्यासागर बैस और महामंत्री नरेंद्र प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में 24 सितंबर को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। संरक्षक देवेंद्र कुमार पाठक ने कहा कि खदान के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है और रोजगार संबंधी अनुबंध का पालन कराना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने निष्कासित श्रमिकों को तत्काल रोजगार दिलाने की मांग की।
महामंत्री नरेंद्र प्रसाद मिश्रा के अनुसार खदान में कुल 1379 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 329 विस्थापित श्रमिक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 845 गैर-विस्थापित श्रमिकों को भी बिना नोटिस और मुआवजा दिए हटाया गया है। इस संबंध में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के जबलपुर क्षेत्र के उप मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष पोर्टल के माध्यम से प्रकरण दर्ज कराया गया है। संगठन के अनुसार मामले में एक पेशी हो चुकी है और अगली पेशी इसी सप्ताह निर्धारित है।
यूनियन ने कहा कि क्षेत्रीय श्रम आयुक्त के समक्ष समझौता नहीं होने की स्थिति में प्रकरण औद्योगिक न्यायाधिकरण केंद्रीय न्यायालय को भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।












