बाहर से डॉक्टर बुलाकर, अवैध क्लीनिक का संचालन…

बाहर से डॉक्टर बुलाकर, अवैध क्लीनिक का संचालन…
हर हफ्ते बाहरी डॉक्टर्स बुलाकर दवाई बेंचने का बढ़ा प्रचलन
सीधी
शहर में कुछेक मेडिकल स्टोर्स द्वारा हफ्ते या एक पखवाड़े में निर्धारित दिन पर बाहर से डॉक्टर बुलाकर अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन कर दवाई बेंचने का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे गोरखधंधा में लगे लोगों द्वारा ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बुलाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाकर यह प्रचारित किया जाता है कि उपचार से बहुत जल्द ही मर्ज खत्म हो जाता है। किन्तु हकीकत कुछ और ही बयां कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार मरीजों की भीड़ जुटाने के लिए बाहर से बुलाए जाने वाले डॉक्टरों का काफी महिमा मण्डन किया जाता है। यह भी दावा किया जाता है कि यदि गंभीर मर्ज से पीडित मरीजों का उपचार बाहर चल रहा है तो अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही उत्कृष्ट उपचार सेवाएं मिलेंगी। इस तरह के दावे होने के बाद कुछ मरीज पहुंचते भी हैं किन्तु वहां जाने पर उन्हें आभास होता है कि मेडिकल स्टोर में विशेष दिन को सजने वाली क्लीनिक में मरीज के उपचार के बजाय दवाई ज्यादा से ज्यादा बेंचने का फंडा अपनाया जा रहा है।
इस तरह के कई भुक्त भोगियों ने भी बताया कि बाहर के अच्छे विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराने के लिए उनके बंगले एवं स्थाई अस्पताल में ही समय नहीं मिल पाता फिर इसी तरह प्रचारित किये जा रहे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास सीधी शहर के मेडिकल स्टोरों में बैठकर मरीजों को देखने के लिए समय कहां से मिल जाता है किन्तु ये सब ज्यादा से ज्यादा कमाई करने की होड़ में कुछ सालों से चल रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बनें मूकदर्शक
सीधी शहर में मेडिकल स्टोर्स में बाहर से डॉक्टरों को बुलाकर विशेष तिथि पर क्लीनिक संचालित करने की वैधता को लेकर भी सवाल खड़े होना लाजिमी है। नियमों के अनुसार यदि किसी मेडिकल स्टोर में लगातार बाहर से डॉक्टरों को बुलाकर मरीजों को उपचार कराया जा रहा है तो उसे क्लीनिक संचालन के लिए लाइसेंस लेना आवश्यक है किन्तु सीधी शहर में शासन के इस नियम की भी धज्जियां उड़ रही हैं।
वहीं मेडिकल स्टोरों में अवैध क्लीनिक संचालन के बढ़ते प्रचलन पर जिला स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी पूरी तरह से मूकदर्शक बनकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
यदि किसी दिन मेडिकल स्टोरों में अस्थाई रूप से चलने वाले क्लीनिक में उपचार के दौरान मरीजों के साथ कोई घटना घटित होती है तो उस दौरान निश्चित हीं जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का यही जबाब होगा कि उन्हें मेडिकल स्टोरों में अस्थाई क्लीनिक संचालन के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।
स्वास्थ्य विभाग की शिथिलता जारी
स्वास्थ्य विभाग की इसी शिथिलता के चलते मेडिकल स्टोर संचालकों में बाहर से डॉक्टर बुलाकर अवैध क्लीनिक संचालित करने की होड़ सी मच गई है। उन्हें यकीन है कि विशेष तिथि पर बाहर से डॉक्टर बुलाने से उनके यहां मरीजों की काफी भीड़ होगी और उनके यहां मौजूद दवाइयों का स्टाक एक ही दिन में खत्म हो जायेगा।
नशीली दवाइयों का बढ़ रहा कारोबार
मेडिकल स्टोरों में कुछ सालों से नशीली दवाइयों को बेंचने का कारोबार कई गुना बढ़ चुका है। लिहाजा ऐसे काफी संख्या में मेडिकल स्टोर हैं जिनकी आमदनी का मुख्य स्त्रोत ही नशीली दवाइयां है। यहां तक कि कई प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की बिक्री भी बेखौफ होकर की जा रही है। दरअसल मेडिकल स्टोरों का नियमित रूप से निरीक्षण न होने के कारण यह व्यवसाय काफी सुरक्षित माना जाता है। इसी के चलते बिना लाइसेंस के भी काफी संख्या में मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। जिला मुख्यालय में ही कई बड़े मेडिकल स्टोर जुगाड़ से लाइसेंस की व्यवस्था करके सालो से संचालित हो रहे हैं। जिनकों देखने वाला कोई नहीं हैं। मेडिकल स्टोर में भारी लाभ के चलते ऐसे लोग भी इस व्यवसाय में आ रहे हैं जिनका मेडिकल से कोई सरोकार पहले नहीं था। फिर भी जुगाड़ बनाकर उनका कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस मामले में ड्रग इन्सपेक्टर की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है।













