विद्यालयों में परोसे जा रहे जानवरों से बत्तर खाना,शिकायत के बाद भी नहीं सुनते वरिष्ठ अधिकारी…

विद्यालयों में परोसे जा रहे जानवरों से बत्तर खाना,शिकायत के बाद भी नहीं सुनते वरिष्ठ अधिकारी…
सीधी सिंहावल। जिले के सिहावल मुख्यालय अंतर्गत कई ऐसे विद्यालय हैं जिसमें किसी कर्मचारी का समूह संचालित है तो कहीं किसी नेता का जिसकी वजह से विद्यालय में घटिया एवं गुणवत्ता विहीन मध्यान भोजन परोसे जा रहे हैं।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुख्यालय के समीप ग्राम पंचायत मेढौली में स्थित प्राथमिक पाठशाला में बच्चों के भोजन करते समय जब विद्यालय पहुंच कर देखा तो तस्वीर देखकर दंग रह गया।
बच्चों के थालियों में चावल के साथ-साथ जो दाल और सब्जी देखी गई तो शायद जानवर भी उसे खाने से इनकार कर देते लेकिन शासकीय विद्यालयों में तो सिर्फ गरीब परिवार के ही बच्चों का पठन-पाठन होता है। नेता एवं अधिकारी सहित बड़े लोगों के बच्चे तो शहर में पठन-पाठन कर शिक्षा प्राप्त करते हैं। तो कैसे निगाह पड़े घटिया भोजन देने वाले संचालित समूहों पर।

वही जब इस विषय पर प्रधानाध्यापक से बात हुई तो उनके द्वारा बताया गया कि गांव के ही लोकल समूह संचालक समूह को संचालित करते हैं। जी समूह का नाम है सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह जिनसे कई बार साफ सुथरा एवं स्वच्छ भोजन बनाने कर देने को कहा जाता है परन्तु यह नहीं मानते और जब अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती है तो वह आते हैं और खाना पूर्ति करते हुए समूह संचालक से मिलकर वापस चले जाते हैं और रवैया इसी तरीके से स्थिर रहती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि वरिष्ठ अधिकारियों के कान में जूं रेंगती है या समूह संचालकों के रवैए में सुधार होता है यह देखना दिलचस्प होगा।
।। सिंहावल से राजबहोर केवट की रिपोर्ट ।।













