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“रतलाम नगर निगम के विवादित आदेश ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें, प्रेस नोट पर मचा हंगामा”

रतलाम: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि पेयजल पाइपलाइन और सीवरेज लीकेज की समस्याओं का समाधान 48 घंटे में किया जाए। इस दिशा में रतलाम नगर निगम ने भी सीवेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन की लीकेज समस्याओं के निराकरण के लिए एक संयुक्त टीम बनाई है, लेकिन नगर निगम के द्वारा जारी किए गए एक विवादित आदेश ने लोगों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी पैदा कर दी है।

नगर निगम का यह आदेश जनता से ही उनकी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा करता है। प्रेस नोट में कहा गया कि लोग सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन की लीकेज को 7 दिन के भीतर मरम्मत करवा लें, अन्यथा उनकी जिम्मेदारी होगी। इस आदेश ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की और लोग इसे अजीबोगरीब और असंगत मानते हुए विरोध में उतरे। इसके बाद नगर निगम ने इस प्रेस नोट को वापस ले लिया और कहा कि इसे संशोधित किया जाएगा।

सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन की खस्ताहाली की समस्या रतलाम में लंबे समय से चल रही है। वार्ड नंबर 32 के पार्षद सलीम मोहम्मद बागवान ने पहले ही नगर निगम से पेयजल में सीवरेज का गंदा पानी आने की शिकायत की थी, लेकिन निगम ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि गंदा पानी लेकर वे कई बार जनसुनवाई में गए, लेकिन अधिकारियों ने कोई समाधान नहीं निकाला।

सलीम मोहम्मद बागवान ने इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक ले जाने की भी कोशिश की है। उनका कहना है कि सीवरेज पाइपलाइन और पेयजल पाइपलाइन को एक साथ पास-पास रखा गया, जो नियमों के खिलाफ है। अब जब सीवरेज प्रोजेक्ट असफल हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी जनता पर डाली जा रही है।

नगर निगम के कार्यपालन अधिकारी राहुल जाखड़ ने स्वीकार किया कि यह आदेश त्रुटि से जारी हुआ था और इसे संशोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का तत्काल समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है और इस पर संचालन टीम काम कर रही है।

रतलाम नगर निगम के इस विवादित आदेश ने शासन और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं, और अब देखा जाएगा कि आने वाले समय में सीवरेज और पेयजल की समस्याओं का समाधान किस तरह से किया जाता है।

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