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भोपाल में दूषित पानी से खतरा, महापौर और अधिकारी बेपरवाह, लोग गटर का पानी उबालकर पीने को मजबूर

भोपाल: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और उसके बाद के हालात के बीच, भोपाल में भी पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही और शासन की अनदेखी के कारण वाजपेयी नगर सहित कुछ अन्य इलाकों में लोग सीवेज का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।

वाजपेयी नगर में पिछले 15 दिनों से सीवेज का गंदा पानी पाइपलाइनों के माध्यम से घरों में पहुंच रहा है, जिससे इलाके के निवासियों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी को उबालकर पीने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि वे पानी खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। इस मुद्दे को लेकर कई बार पार्षद और नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय निवासी कविता बाई और सुमित भोमराज का कहना है कि गटर का गंदा पानी लगातार उनके घरों में आ रहा है और वे इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसी तरह की समस्याओं को लेकर पार्षद पति हरिओम आसेरी भी गुमराह कर रहे हैं और समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

जब इस मुद्दे पर नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। अधिकारियों ने कहा कि इंदौर में घटना हुई है, भोपाल में नहीं और यह निगम अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। यही नहीं, पानी की टेस्टिंग भी अब नगर निगम के ड्राइवरों के द्वारा की जा रही है, जो बिल्कुल अनुचित है।

महापौर मालती राय से जब इस गंभीर मुद्दे पर सवाल किए गए, तो उन्होंने भी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और सिर्फ कहा, “पता करके बताते हैं, अफसरों से पूछो।”

भोपाल कलेक्टर ने कहा कि गाइडलाइंस बना दी गई हैं और किसी भी शिकायत पर जांच की जाएगी। मगर यह सभी कार्रवाई केवल आधिकारिक बयानबाजी तक सीमित रही है, जबकि वास्तविक समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं और यह इंदौर जैसी त्रासदी के संभावित खतरे को हवा दे रहा है, जिसके कारण अब पूरे शहर में स्वच्छ पानी की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

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