मध्य प्रदेशसिंगरौली

उमरा : आत्मा की पुकार और आत्मशुद्धि की पवित्र यात्रा

सिंगरौली (। वार्ड-39 वैढ़न शहर की निवासी श्रीमती सालहा बेगम, शम्सा बेगम एवं शमा परवीन 23 फरवरी 2026 को रमजान के पवित्र महीने में उमरा यात्रा के लिए सऊदी अरब रवाना हो गईं। उनके प्रस्थान के अवसर पर परिवारजनों, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों ने उन्हें दुआओं और शुभकामनाओं के साथ विदा किया। क्षेत्रवासियों ने उनसे अपनी तथा इलाके की खुशहाली के लिए विशेष दुआ करने का आग्रह भी किया। उनके उमरा पर रवाना होने से परिवार और मोहल्ले में खुशी का माहौल है।

उमरा इस्लाम की एक पवित्र इबादत है, जो हर मुसलमान के दिल में खास स्थान रखती है। यह यात्रा वर्ष में किसी भी समय की जा सकती है। उमरा अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसका सवाब अत्यंत बड़ा माना गया है। जो व्यक्ति उमरा की नियत करता है, वह केवल एक सफर पर नहीं निकलता, बल्कि अपने रब से नज़दीकी पाने की सच्ची कोशिश करता है।
उमरा का मुख्य केंद्र मक्का है, जहाँ स्थित है विश्व की सबसे पवित्र मस्जिद मस्जिद अल-हरम। इसी मस्जिद के मध्य में पवित्र काबा स्थित है, जिसकी ओर रुख कर दुनिया भर के मुसलमान नमाज़ अदा करते हैं। उमरा के दौरान श्रद्धालु काबा का सात बार तवाफ (परिक्रमा) करते हैं और सफा तथा मरवा पहाड़ियों के बीच सई (सात चक्कर) लगाते हैं। अंत में बाल कटवाकर या मुंडवाकर एहराम की अवस्था समाप्त की जाती है।

एहराम की सादा पोशाक यह संदेश देती है कि अल्लाह के सामने सभी बराबर हैं—न कोई अमीर, न कोई गरीब। यह समानता, विनम्रता और भाईचारे की सीख उमरा की रूह मानी जाती है। यह यात्रा इंसान को घमंड से दूर कर संयम और आत्ममंथन की प्रेरणा देती है।
आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में उमरा जैसी आध्यात्मिक यात्रा मन को सुकून और नई ऊर्जा देती है। काबा का दीदार और हजारों लोगों के साथ इबादत का दृश्य दिल को उम्मीद और सकारात्मकता से भर देता है। यह अनुभव व्यक्ति को अपनी गलतियों पर विचार कर एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

उमरा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है—आत्मशुद्धि और अल्लाह की रज़ा पाने का माध्यम। जो भी इस पवित्र यात्रा पर जाने का सौभाग्य प्राप्त करता है, वह इसे अपने जीवन का एक अनमोल अध्याय मानता है।

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