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नेपाल में नई पार्टी के सत्ता संभालने की तैयारी, भारत-नेपाल संबंधों में सुधार की उम्मीद

काठमांडू। नेपाल में हाल ही में हुए चुनावों के बाद नई राजनीतिक स्थिति बनने जा रही है। चुनाव परिणामों के बीच राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सत्ता में आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे काठमांडू और नई दिल्ली के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई सरकार स्थिर और मजबूत बनती है तो दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से चली आ रही कूटनीतिक दूरी कम हो सकती है। भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि दोनों देशों के रिश्तों की आधारशिला रही है, जो खुली सीमा, व्यापारिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाती है।

भारत सरकार ने 5 मार्च को हुए चुनावों के सफल आयोजन का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत हमेशा नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का समर्थक रहा है और चुनावों के लिए नेपाल सरकार के अनुरोध पर आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान की गई। मंत्रालय ने नई सरकार के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई है।

पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ने से भारत की चिंताएं भी बढ़ी थीं। हालांकि नई राजनीतिक परिस्थितियों में नेपाल की संभावित सरकार संतुलित विदेश नीति अपनाने के संकेत दे रही है। आरएसपी के संभावित प्रधानमंत्री उम्मीदवार बालेंद्र शाह को मजबूत राष्ट्रवादी नेता माना जाता है, जो ‘नेपाल फर्स्ट’ नीति के साथ दोनों पड़ोसी देशों से संतुलित संबंध बनाए रखने के पक्षधर बताए जा रहे हैं।

आर्थिक दृष्टि से भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार नेपाल के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 63 प्रतिशत है, जबकि चीन 13 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐसे में नई सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कूटनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।

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