मध्य प्रदेशसीधी

हरित रोजगार की गारंटी है गाय,मोगली पलटन ने निकाली जागरूकता रैली

सीधी। बाल टोली ‘मोगली पलटन’ द्वारा आज 8 मार्च रविवार को अपनी नौवीं मासिक ‘कछुआ चाल’ साइकिल रैली का आयोजन किया गया। ‘गाय है तो गाँव है’ के संकल्प के साथ यह रैली निकाली गई, पिछले नौ महीनों से प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को आयोजित होने वाली जागरूकता श्रृंखला का हिस्सा है। लगातार नौ महीनों से आयोजित होने वाली इस रैली ने अब एक बौद्धिक आंदोलन का रूप ले लिया है, जो ग्रामीण परिवेश में गाय, प्रकृति और आजीविका के आपसी संबंधों पर एक नई वैचारिक दिशा प्रदान कर रहा है। रैली का प्रारंभ ग्राम हनुमानगढ़ स्थित स्व० चन्द्रप्रताप तिवारी स्मारक स्थल से हुआ, जो गाँव की मुख्य सड़कों से होते हुए दूसरे छोर पर संपन्न हुई।

रैली का सबसे भावनात्मक और प्रभावशाली आकर्षण बाल टोली द्वारा बाँटी गई ‘गाय की चिट्ठी’ रही। इस पत्र के माध्यम से बच्चों ने एक अनूठा प्रयास किया है, इसमें गाय के दृष्टिकोण से मनुष्य और गौ-वंश के सदियों पुराने संबंधों को समझने और पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई है। चिट्ठी में गाय की व्यथा, उसकी अपेक्षाएँ और समाज के प्रति उसके योगदान को “स्वयं की आवाज़” में पिरोया गया है, ताकि लोग इस मूक पशु के साथ अपने भावनात्मक और आर्थिक जुड़ाव को गहराई से महसूस कर सकें।

हरित रोज़गार का आधार
रैली के माध्यम से बाल टोली के सदस्यों ने यह संदेश पुरज़ोर तरीके से साझा किया कि गाय ‘ग्रीन एम्प्लॉयमेंट’ की गारंटी है। बच्चों ने रेखांकित किया कि गाय के उत्पादों जैसे दूध, गोबर और गौमूत्र के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और डेयरी जैसे अनेक स्वरोज़गार के अवसर सृजित होते हैं। यह मॉडल न केवल गाँव को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाता है, बल्कि पर्यावरण को रसायनों के दुष्प्रभावों से बचाकर एक सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित करता है,कछुआ चाल’ रैली का शीर्षक सतत विकास के उस दर्शन को रेखांकित करता है, जहाँ प्रगति की गति से अधिक उसके स्थायित्व का महत्त्व है। बाल टोली का मानना है कि आधुनिक समय की अनियंत्रित विकासवादी दौड़ पारिस्थितिक तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचा रही है। इसके विपरीत, कछुए की भाँति संतुलित और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण प्रगति ही भविष्य को सुरक्षित रख सकती है।

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