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बेऊर जेल से रची गई बैंक डकैती की साजिश, बिहार से दो और आरोपी गिरफ्तार

7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजे गए, मास्टरमाइंड जेल में बैठकर चला रहा था नेटवर्क

सिंगरौली। जिला मुख्यालय स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 17 अप्रैल 2026 को हुई डकैती के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। थाना वैढ़न पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात में शामिल दो और आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चन्दन उर्फ चईया यादव (21) और गुलशन (19) निवासी खीरूबिगहा, थाना नगरनौसा, जिला नालंदा (बिहार) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी सीधे तौर पर डकैती की घटना में शामिल नहीं थे, लेकिन पूरी साजिश रचने और लूट के माल को ठिकाने लगाने में इनकी अहम भूमिका रही है।

पहले से गिरफ्तार आरोपियों ने खोले राज
इससे पहले पकड़े गए आरोपी कमलेश ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसने फंटूस, पंकज, राजेश और छोटू के साथ मिलकर बैंक डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ को आगे बढ़ाया तो साजिश की परतें खुलती चली गईं।

जेल से संचालित हो रहा था पूरा गिरोह
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस डकैती का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह है, जो इस समय बिहार की बेऊर जेल में बंद है। उसने उड़ीसा की कुचिंडा जेल में बंद अपने शागिर्द पीयूष जायसवाल के जरिए इस पूरी वारदात को अंजाम दिलवाया। जेल के अंदर से ही इस गैंग का संचालन किया जा रहा था, जो पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

पुलिस टीम की सटीक रणनीति से मिली सफलता
इस कार्रवाई को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक हेमंत सिंह चौहान के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने विशेष टीम का गठन किया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सर्वप्रिय सिन्हा के नेतृत्व में टीम ने बिहार में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

इनका रहा सराहनीय योगदान
पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक संदीप नामदेव, उपनिरीक्षक उदयचंद करिहार, उपनिरीक्षक अमन वर्मा, सहायक उपनिरीक्षक पप्पू सिंह, सहायक उपनिरीक्षक लेखचंद डोहार, प्रधान आरक्षक मुनेन्द्र राणा एवं आरक्षक गौतम कुमार की भूमिका सराहनीय रही है।

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