आपातकाल की 51वीं बरसी: पीएम मोदी ने इसे बताया लोकतंत्र का ‘सबसे काला अध्याय’, कहा- ‘कभी माफ न करें, कभी न भूलें’

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 1975 में लगाए गए आपातकाल की 51वीं बरसी पर इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार दिया है। कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे इस दिन को कभी न भूलें और न ही इसके लिए कभी माफ करें।
संविधान और न्यायपालिका पर प्रहार
पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर ‘#संविधान_हत्या_दिवस’ हैशटैग के साथ एक विस्तृत पोस्ट साझा किया। उन्होंने आपातकाल लगाने वालों पर संविधान की हत्या करने और न्यायपालिका को गुलाम बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि महज अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाने में बदल दिया गया था और प्रेस (मीडिया) की आजादी का गला घोंट दिया गया था।
यातनाओं और गिरफ्तारियों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों को याद करते हुए बताया कि उस दौर में करोड़ों लोगों का जीना मुश्किल कर दिया गया था। मीसा (MISA) के तहत निर्दोष लोगों और छात्रों को अंधाधुंध गिरफ्तार किया गया। उन्होंने विशेष रूप से जॉर्ज फर्नांडिस का जिक्र किया, जिन्हें जंजीरों में बांधकर कठोर यातनाएं दी गई थीं।
जनता की ताकत से लौटा लोकतंत्र
देशवासियों के संघर्ष और साहस की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मीडिया पर पाबंदी और खौफ के उस माहौल के बावजूद भारत के लोगों का लोकतंत्र से विश्वास नहीं डिगा। जनता ने जाति, पंथ और संप्रदाय से ऊपर उठकर एकजुट होकर मतदान किया और देश में लोकतंत्र की सफलतापूर्वक पुनर्स्थापना की।
क्यों जरूरी है याद रखना?
अपने संदेश के अंत में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस काले दिन को बार-बार याद करने का उद्देश्य महज किसी को भला-बुरा कहना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस दाग को हमेशा याद रखना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी नेता में दोबारा ऐसा पाप करने या तानाशाही के रास्ते पर जाने की हिम्मत पैदा न हो।












