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रूसी तेल पर टैरिफ के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा में मदद को अमेरिका तैयार

रुबियो ने कहा- राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट देने का अधिकार

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के बीच अमेरिका ने अपने साझेदार देशों की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों में मदद करने की बात कही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों को ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करने की स्थिति में है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में दी जाएगी।

यह मुद्दा बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बैठक में भी उठा। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि उन्होंने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को अमेरिकी पक्ष के सामने रखा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों नेताओं ने रूस और ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों पर चर्चा की।

रुबियो ने कहा कि संबंधित कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कुछ मामलों में छूट देने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल कब और किस तरह किया जाएगा, इसका फैसला राष्ट्रपति करेंगे।

प्रस्तावित टैरिफ का भारत पर असर पड़ने की संभावना को लेकर भी चर्चा है। इससे अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर प्रभाव पड़ सकता है और दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार समझौते की बातचीत प्रभावित हो सकती है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण है। रूस भारत को कच्चे तेल के साथ रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस के कुल तेल निर्यात का करीब 37 प्रतिशत भारत खरीदता है। ऐसे में रूसी तेल पर किसी नए शुल्क या प्रतिबंध का भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है।

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