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पितृपक्ष में 14 दिन के पक्ष में होंगे 16 दिन श्राद्ध

26 सितंबर से शुरुआत, 2 अक्टूबर को एक ही दिन होगा षष्ठी-सप्तमी श्राद्ध

नई दिल्ली। वर्ष 2026 में पितृपक्ष की तिथियों में विशेष स्थिति बन रही है। हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक 14 दिनों का रहेगा, लेकिन श्राद्ध कर्म की अवधि 16 दिनों की मानी जाएगी। इसका कारण भाद्रपद पूर्णिमा से श्राद्ध कर्म की शुरुआत और कृष्ण पक्ष में एक तिथि के क्षय को बताया गया है।

पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को किया जाएगा। इसके बाद 27 सितंबर से नियमित पितृपक्ष श्राद्ध शुरू होंगे। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो।

इस वर्ष षष्ठी और सप्तमी तिथि का क्षय होने के कारण दोनों तिथियों का श्राद्ध 2 अक्टूबर को एक ही दिन किया जाएगा। वहीं 29 सितंबर को भरणी श्राद्ध और 4 अक्टूबर को मातृनवमी श्राद्ध होगा। 7 अक्टूबर को संन्यासी, यति और वैष्णव श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध तथा 9 अक्टूबर को घात चतुर्दशी का श्राद्ध किया जाएगा। 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या और पितृ विसर्जन होगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध का अधिकार मुख्य रूप से पुत्र को माना गया है। पुत्र के अभाव में पौत्र और उसके अभाव में पुत्री का पुत्र यानी दौहित्र श्राद्ध कर सकता है। परिस्थितियों के अनुसार परिवार के अन्य उत्तराधिकारी या सगोत्र व्यक्ति द्वारा भी श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है।

पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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