पत्नी को ‘बेवकूफ’ और ‘बेकार’ कहना अपने आप में आपराधिक क्रूरता नहीं : सुप्रीम कोर्ट
कनाडा में महिला की आत्महत्या के मामले में पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द, दहेज मांग और प्रताड़ना के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पत्नी को बेवकूफ या बेकार कहना अपने आप में आपराधिक क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कनाडा में आत्महत्या करने वाली महिला के पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या और मारपीट सहित विभिन्न आरोपों में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, महिला की शादी वर्ष 2021 में हुई थी। वर्ष 2022 में वह अपने पति के साथ कनाडा के टोरंटो चली गई थी। 11 जून 2023 को उसने एक अपार्टमेंट की 22वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला था। महिला के पिता ने आरोप लगाया था कि उसका पति उसे गालियां देता था और बेवकूफ व बेकार कहकर अपमानित करता था। उन्होंने दहेज की मांग और प्रताड़ना के भी आरोप लगाए थे।
दहेज मांग और प्रताड़ना के आरोप
महिला के पिता के अनुसार, शादी से पहले 15 तोला सोने की मांग की गई थी। शादी के बाद पहली दिवाली पर सोने की अंगूठी और कंगन तथा वर्ष 2022 में 3 तोला सोना मांगे जाने का आरोप भी लगाया गया। इन शिकायतों के आधार पर पति के खिलाफ दहेज हत्या, क्रूरता, मारपीट और अपमान से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी।
कनाडा में कोरोनर की जांच और टोरंटो पुलिस की वर्ष 2024 की क्लोजर रिपोर्ट में साजिश या संघर्ष के संकेत नहीं मिले थे। जांच में सुसाइड नोट की लिखावट महिला की लिखावट से मेल खाई। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार घटना के समय पति घर पर मौजूद नहीं था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पति
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने पति के माता-पिता और बहन के खिलाफ मामला रद्द कर दिया था, लेकिन पति के विरुद्ध मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया था। इसके बाद पति ने वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। उसने दलील दी कि आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और सुसाइड नोट में उसे पत्नी की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि महिला की मौत से पहले पति या उसके परिवार के खिलाफ दहेज मांगने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। अदालत ने शादी में दिए गए 15 तोला सोने और दिवाली पर दिए गए गहनों को पारिवारिक उपहार माना। महिला के भाई द्वारा पति के खाते में भेजे गए 1 लाख रुपये को भी दहेज का प्रमाण नहीं माना गया, क्योंकि यह रकम भारत आने की फ्लाइट टिकट बुक कराने के लिए भेजी गई थी।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों के आधार पर पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी।













