लगातार बारिश से बढ़ी गुलाबी ठंड,बाजारों में गर्म कपड़ों से सजने लगी दुकानें…

लगातार बारिश से बढ़ी गुलाबी ठंड,बाजारों में गर्म कपड़ों से सजने लगी दुकानें…
रजाई एवं गद्दों की भराई का कार्य हुआ तेज…
सीधी पोल खोल पोस्ट
इस वर्ष पर्याप्त बरसात होने के कारण अभी से गुलाबी ठंडक ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बीते दो-तीन दिनों से भी बारिश का दौर जारी है जिससे इस ठंडक ने दिन ढलते ही अपना भरपूर असर दिखना शुरू कर दिया है।
गुलाबी ठंडक बढ़ते ही गर्म कपड़ों की मांग भी तेजी के साथ बढऩे लगी है। बाजार में गर्म कपड़ों की बिक्री का काम बढऩे से व्यवसायियों में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। ऊनी कपड़ों की मांग भी शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा रजाई एवं गद्दों की भराई का कार्य शुरू हो गया है।
सीधी शहर में जगह-जगह रजाई एवं गद्दों की तगाई एवं भराई का कार्य करने के लिए सडक़ की पटरियों पर ही दुकानें सज गई हैं। रजाई गद्दे की भराई का कार्य शुरू होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से भी काफी संख्या में महिला एवं पुरूष शहर में पहुंच रहे हैं जिससे उन्हे भी अच्छा कार्य मिल सके।
चर्चा के दौरान रजाई एवं गद्दों के व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बताया कि उनकी मजदूरी प्रति गद्दा एवं रजाई के अनुसार मिलती है। इस वजह से सभी यह प्रयास करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा गद्दा एवं रजाई की भराई का कार्य पूर्ण किया जा सके जिससे ज्यादा से ज्यादा उन्हे मजदूरी भी मिल सके। गद्दा एवं रजाई भराई के कार्य से जुड़े लोगों द्वारा बाहर से रूई मगाई जाती है। रूई की किस्में भी कई तरह की होती है। अधिकांश लोग सामान्य रूई की खरीदी करते हैं। सामान्य रूई की कीमत 100 रूपए किलो से लेेकर 150 रूपए तक है। उच्च गुणवत्ता वाली रूई की कीमत 200 रूपए किलो से ज्यादा बनी हुई है। फिर भी लोग अपनी जरूरत एवं क्षमता के अनुसार रूई की खरीदी करते हैं। कुछ वर्षों से मिलावटी रूई भी बाजार में बिकने के लिए आ रही है, इसकी कीमत सबसे कम होने के कारण इसकी मांग भी ज्यादा रहती है। उक्त रूई को कपड़ा मिलों के कचरे के रूप में माना जाता है। जिसका उपयोग भी रजाई एवं गद्दा की भराई में किया जाता है। बाजार में रेडिमेड रजाई एवं गद्दे भी बिकने के लिए तैयार हैं। इनकी कीमतें कम होने के कारण जिनके पास समय की कमी है इसकी खरीदी करते हैं। रेडिमेड रजाई एवं गद्दों में रूई की गुणवत्ता भी काफी कमजोर होती है। इस वजह से चार सौ रूपए से लेकर 12 सौ रूपए नग तक इनकी बिक्री हो रही है। रूई एवं गद्दा रजाई की व्यवस्था में लगे कुछ ग्राहकों ने चर्चा के दौरान बताया कि ठंड की शुरूआत हो जाने के कारण रजाई एवं गद्दा की व्यवस्था करना सबसे ज्यादा जरूरी है। शहरों में भले ही ठंड कम है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शाम ढलने के बाद से ही गलन का असर बढऩे लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग रजाई एवं गद्दा का उपयोग ठंड से बचने के लिए अब प्राथमिकता के साथ कर रहे हैं।
दुकानें में सजे पुराने स्टाक के ऊनी कपड़े
ठंड के दिनों में ऊनी कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। हर वर्ग के लोग अपनी जरूरत एवं बजट के अनुसार ऊनी कपड़ों की खरीदी करते हैं। ऊनी कपड़ों में स्वेटर जर्सी, जर्किन की मांग सबसे ज्यादा बनी रहती है। इसी वजह से ऊनी कपड़ों को खरीदने के लिए भी ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों द्वारा अपनी दुकान के काउंटरों में अब ऊनी कपड़ों का स्टाक भर दिया गया है। जिससे ग्राहकों को उनकी मन पसंद का पोषाक उपलब्ध कराया जा सके।
चर्चा के दौरान कुछ महिला ग्राहकों ने बताया कि मांग बढ़ते ही ऊनी कपड़ों के दाम भी काफी ज्यादा बताए जा रहे हैं। अधिकांश दुकानों में दो-तीन वर्ष पुराने गरम कपड़ों के स्टाक को रखा गया है। इस वजह से नये स्टाक के ऊनी कपड़े काफी कम संख्या में नजर आ रहे हैं। कुछ व्यवसायी ही नया स्टाक फिलहाल मगाए हुए हैं। ज्यादातर पुराने स्टाक से ही अपना काम चला रहे हैं। ऐसे में ऊनी कपड़ों एवं गर्म कपड़ों की खरीदी करने में सही बेराइटी नहीं मिल रही है। अधिकांश व्यवसायी पुराने स्टाक पर ही ठंड के दिनों में अपना कारोबार करने की तैयारी बनाए हुए हैं। जिसके चलते उन्हे खरीदी करने में भी कई दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्कूली बच्चों को निर्धारित कलर के स्वेटर एवं जर्सी के साथ ही जूते एवं मोजों की अनिवार्यता भी बन गई है इस वजह से हर तरफ अब ठंड से संबंधित सामग्रियों के स्टाक बाजार में नजर आ रहे हैं और इनकी खरीदी भी तेज हो रही है।













