एक तरफ प्रतिबंधित क्षेत्र से हो रहा रेत का उत्खनन परिवहन तो दूसरी तरफ जानवरों का शिकार…

एक तरफ प्रतिबंधित क्षेत्र से हो रहा रेत का उत्खनन परिवहन तो दूसरी तरफ जानवरों का शिकार…
मूक दर्शक बने जिम्मेवार विभाग…
सोन घड़ियाल एवं वन विभाग सवालों के घेरे में…
संजय सिंह सीधी मझौली पोल खोल पोस्ट
दुर्लभ जलजीव घड़ियाल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जिले में सोन घड़ियाल विभाग की स्थापना की गई है जिसकी मझौली तहसील के बनास नदी पुल के नीचे उत्तर दिशा एवं वाणसागर बांध के नीचे से सीमा बनाई गई है।इस तरह सोन नदी एवं बनास नदी का यह क्षेत्र संवेदनशील एवं प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है लेकिन इस क्षेत्र से लाखों टन रेत का उत्खनन एवं परिवहन हो रहा है वह भी वन क्षेत्र में छोटे बड़े वाहन आते जाते हैं जिस कारण वन विभाग एवं सोन घड़ियाल विभाग के आला अधिकारी सवालों के घेरे में देखे जा रहे हैं।

राजस्व ग्राम परसिली की सीमा से हो रहा रेत का कारोबार
राजस्व ग्राम परसिली की सीमा से गुजरने वाली बनास नदी के दक्षिण पूर्वी भाग में लाखों टन रेत का उत्खनन एवं परिवहन हो रहा है जहां उत्खनन स्थल पर देखने से ही साबित होता है कि जेसीबी मशीन से रेत उत्खनन कर छोटे बड़े वाहनों में लोड कर परिवहन किया गया है जहां बिना विभाग के संरक्षण में ऐसा कारोबार संभव नहीं है।
3 किलोमीटर दूर है डिप्टी रेंजर का आवास
सवाल और भी गंभीर हो जाता है तब जब रेत उत्खनन स्थल से महज 3 किलोमीटर दूर चमराडोल वन चौकी में डिप्टी रेंजर का आवास है जहां वनरक्षक एवं चौकीदार वन सुरक्षा के लिए तैनात हैं फिर भी वन क्षेत्र से रेत का कारोबार जारी है।
इधर जंगली जानवरों के शिकार पर विभाग का मूक बधिर बने रहना बना चर्चा का विषय
जंगल सीमा से जहां धड़ल्ले से रेत का कारोबार हो रहा है वहीं जंगली जानवरों का आए दिन शिकार होना भी विभाग की लापरवाही व नाकामयाबी को दर्शाता है एक वर्ष के अन्दर यहां लगभग आधा दर्जन बाघों का शिकार जंगल में करेंट लगाकर किया जा चुका है लेकिन विभाग के आला अधिकारी जाँच व ठोस कार्यवाही के बजाय परिवार के साथ स्वयं जंगल सफारी में ब्यस्त देखे जाते हैं।
जिम्मेवारी लेने से भाग रहे विभाग
कहने को तो जंगल व जंगली जानवरों की देख-रेख के लिए सरकारी तन्त्र द्वारा कई अलग-अलग विभागों को जिम्मेवारी सौपी गई है जिनमे सोन घड़ियाल,संजय टाईगर रिजर्व व कोर एवं बफर जोन में अलग-अलग रेंजर्स रखे गए हैं लेकिन कोई भी यहां हो रहे रेत उत्खनन,जंगल से अवैध लकड़ी की कटाई व परिवहन एवं जंगली जानवरों की हो रही मौतों पर सामने आकर जवाब नही देना चाहता पूंछे जाने पर अपना पल्ला झाड़ दूसरे का हवाला देकर भाग निकलता है।













