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मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन जिला ईकाई सिंगरौली के तत्वावधान में आयोजित हुई भव्य काव्य गोष्ठी

सिंगरौली- दिनांक 8 फरवरी 2026 को मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वाधान में उत्कर्ष हायर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया| जिसमें कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की| इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता रीवा से पधारे वरिष्ठ रचनाकार डॉ कैलाश तिवारी ने किया| कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती की पूजा अर्चना उपस्थित कवियों के द्वारा किया गया| मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव संजीव पाठक सौम्य, एवं उपाध्यक्ष डॉ सुरेश कुमार मिश्र” गौतम” जी ने आमंत्रित कविजनों का पुष्प हार पहना कर स्वागत किया गया|

 

मंच का सफल संचालन करते हुए संस्था के अध्यक्ष डॉ प्रदीप द्विवेदी सत्यव्रत ने मां वीणा पाणिनी की वाणी वंदना हेतु वरिष्ठ गीतकार श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव को आमंत्रित किया| आपने सुमधुर स्वर में मां शारदा मां शारदा, स्वीकार लो यह प्रार्थना सुनाकर मां वाग्देवी का आह्वान किया| नवोदित कवयित्री सुश्री शिवांगी गुप्ता ने कलम की ताकत को प्रतिपादित करते हुए रचना प्रस्तुत की , ताकत इसकी मत पूछो, यह तलवारों से भारी है, जब भी चलती यह कागज पर, हिलती दुनिया सारी है| अगले पायदान पर सुश्री उर्मिला तिवारी को बुलाया गया आपने ” नयनों ने नयनों से, जब पहला स्वप्न बुना था, मौन की देहरी पर जैसे प्रेम का दीप जला था| बरगवां सिंगरौली से पधारे वरिष्ठ कवि श्री शंकर प्रसाद शुक्ल ने मानवीय मूल्यों पर अनेक रचनाएं प्रस्तुत की, एक बानगी देखिए. होंगे वे कोई और जिन्हें, चाह सदा कुछ पाने की! तरुवर सा है जीवन मेरा, मेरी आदत रही गंवाने की!! सभागार को काव्यमय वातावरण प्रदान करते हुए श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव ने अपने छंद और गीतों से रस वर्षा करते हुए दशरथ नंदन, कौशिल्या चक्षु अंजन, कि मर्यादा पुरुष श्री राम है, मंद मंद मुस्कान अधर पर लिए हुए, जानकी की छवि को निहारे श्री राम है| अवधेश नामदेव ने “ये मत पूछो कहां से सच बोलने की आजादी बढ़ी|

संस्था के सचिव एवं गजलकार संजीव पाठक सौम्य ने लूटम लूट मची है जुग अइसा है, दादा दादी घर दुआर सब पईसा है| लूटम लूट मची है जुग अइसा है,
दादा दिदी घर दुआर सब पइसा है| बैरीउ अइसन न खुरखुंद मचामा, ई नात ई घर परिवार कइसा है| वरिष्ठ रचनाकार डॉ सुरेश मिश्र गौतम ने गीत गजल और मुक्तक सुनाकर ख़ूब वाहवाही लूटी, बानगी देखिए.. यही आशीष मेरी है, यही अरमान है मेरा! बढ़ो कर्तव्य पथ पर तुम, यही अभियान है मेरा| मंच का सफल संचालन कर रहे डॉ प्रदीप सत्यव्रत ने गुंजत मधुकर सुमन पर, करत मधुर रसपान! कमसिन कलियां खिल उठी, लिए अधर मुस्कान| सुनाकर वातावरण को ऊंचाइयां प्रदान की| वरिष्ठ कवि सुरेश गुप्त ग्वालियरी ने, जाने कितने धागे टूटे रिश्तों की तुरपाई में, उलझी गांठे कैसे सुलझे, सोच रहा तन्हाई में!! अब बारी थी रीवा से पधारे डॉक्टर कैलाश तिवारी जी का.. आपने मुक्तक छंद और अपने गीतों से सभागार को काव्य रस से भिगो दिया, तन मन धन से पाला पोसा, जिन्हें पढ़ाया था जी भर के, वे सब आज पराए लगते, दिखते जैसे ठगे पिताजी| आभार व्यक्तव स्कूल के डायरेक्टर सूरज तिवारी ने किया| स्वल्पाहार एवं आमंत्रित कवि जनों को शॉल श्री फल भेट कर कार्यक्रम अपने पूर्णता को प्राप्त हुआ|

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