साइबर अपराध की जांच अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हाथों में देने की तैयारी
आईटी एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव, इंस्पेक्टर से ऊपर रैंक के अधिकारियों को मिल सकती है जांच की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत साइबर अपराधों की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर से ऊपर रैंक के पुलिस अधिकारियों को देने का प्रावधान किया जा सकता है।
यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजा है। संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की कार्रवाई रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है। समिति का मानना है कि साइबर अपराधों की जटिलता को देखते हुए इनकी जांच अनुभवी एवं प्रशिक्षित अधिकारियों से कराई जानी चाहिए।
वर्तमान में आईटी एक्ट की धारा 78 के तहत इंस्पेक्टर या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी साइबर अपराध की जांच कर सकता है। समिति ने जांच की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस सीमा को बढ़ाने की सिफारिश की है। जांच अधिकारियों को डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर कानून, साइबर सुरक्षा, आधुनिक जांच तकनीक और घटना प्रतिक्रिया का विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया है।
गौरतलब है कि 2008 के संशोधन के बाद 2009 से साइबर अपराध की जांच के लिए न्यूनतम रैंक डीएसपी से घटाकर इंस्पेक्टर कर दी गई थी। अब करीब डेढ़ दशक बाद इसमें फिर बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव लागू होने पर ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी, डिजिटल फ्रॉड और साइबर हमलों की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका बढ़ सकती है। फिलहाल अंतिम निर्णय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।













