टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालते रहेंगे पद
एजीएम से पहले बड़ा फैसला, नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत

मुंबई। टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। वे अपने वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। यह घटनाक्रम टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से ठीक पहले सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपना इस्तीफा सौंपा है। एजीएम में निदेशक के रूप में उनकी पुनर्नियुक्ति पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जानी थी, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने दोबारा इस पद के लिए अपनी दावेदारी नहीं करने का निर्णय लिया है।
चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी रहने से टाटा समूह को नए नेतृत्व की तलाश और बदलाव की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
कार्यकाल बढ़ाने को लेकर बनी थी असमंजस की स्थिति
पिछले कुछ महीनों से एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच कंपनी के भविष्य और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए थे। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और कंपनी की रणनीति को लेकर उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
टाटा समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया
एन चंद्रशेखरन ने वर्ष 1987 में टाटा समूह से अपने करियर की शुरुआत की थी। वर्ष 2009 में वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सीईओ बने और फरवरी 2017 में रतन टाटा के बाद टाटा संस के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली।
उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने एयरलाइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण और डिजिटल सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया। उनके कार्यकाल में समूह ने कई बड़े रणनीतिक फैसले लिए और वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत की।
टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों जैसे टीसीएस, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया समेत कई बड़े कारोबारों की होल्डिंग कंपनी है।
अब एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा समूह में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सभी की नजरें 18 अगस्त को होने वाली एजीएम और भविष्य के नेतृत्व संबंधी फैसलों पर टिकी हैं। हालांकि, इस मामले में टाटा संस की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।












