सिहावल में वोटों की ‘काट-छांट’ का खेल! 16,478 की जीत, 16,110 वोट गायब—जनमत या जालसाज़ी? : पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल…

सिहावल में वोटों की ‘काट-छांट’ का खेल!
16,478 की जीत, 16,110 वोट गायब—जनमत या जालसाज़ी? : पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल…
भोपाल : कांग्रेस पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल का आरोप
सिहावल की सियासत में आज जो हिसाब खुला है, वह सिर्फ़ अंकों का नहीं, अमानत और इरादे का सवाल है। 2023 में जिस जनमत ने 16,478 मतों से फ़ैसला सुनाया था, उसी जनमत के 16,110 वोट आज एसआईआर की कैंची में कट गए। यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पवित्र डायरी पर खिंची एक स्याह लकीर है—जहाँ तादाद बोलती नहीं, बल्कि सच्चाई चीख़ती है।
जब वोट घटते हैं तो भरोसा भी घटता है; और जब भरोसा टूटता है तो हुकूमत की नैतिक बुनियाद हिलती है। चुनावी रजिस्टर की इस जादूगरी में सवाल उठता है—क्या अवाम की आवाज़ काग़ज़ों में गुम कर दी गई? जनमत की हिफ़ाज़त अगर रियासत की ज़िम्मेदारी है, तो इस कटौती का जवाब भी उसी संजीदगी से देना होगा, वरना लोकतंत्र सिर्फ़ एक रस्म बनकर रह जाएगा।
आज ज़रूरत है कि सियासत तहज़ीब और इंसाफ़ की ज़बान बोले। अवाम का हक़ किसी फ़ाइल में दबाया नहीं जा सकता, न ही वोट की क़ीमत किसी दफ़्तर में तय होती है। सिहावल की धरती पूछ रहीहै—हुकूमत जनमत से बनी थी या जनमत को मोड़कर? जवाब देर से आया तो इतिहास उसे माफ़ नहीं करेगा।













